युवाओं की राजनीति में घटती भागीदारी भारतीय लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत मानी जा रही है। देश की सबसे बड़ी जनसंख्या युवा वर्ग की होने के बावजूद, राजनीतिक प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है। यह सवाल महत्वपूर्ण है कि आख़िर इसके पीछे क्या कारण हैं।
राजनीति से बढ़ती दूरी
आज का युवा राजनीति को अक्सर भ्रष्टाचार, नकारात्मकता और सत्ता संघर्ष से जोड़कर देखता है। राजनीतिक बहसों में विकास और विचारधारा से ज़्यादा आरोप-प्रत्यारोप हावी होने के कारण युवाओं का विश्वास राजनीतिक व्यवस्था से कम होता जा रहा है।
रोज़गार और करियर की प्राथमिकता
बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रोज़गार की अनिश्चितता के कारण युवा वर्ग का मुख्य फोकस शिक्षा और करियर पर रहता है। राजनीति को अस्थिर और जोखिम भरा क्षेत्र मानकर कई युवा इससे दूर रहना ही बेहतर समझते हैं।
प्रतिनिधित्व की कमी
राजनीतिक दलों में युवाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। वरिष्ठ नेताओं का वर्चस्व और आंतरिक लोकतंत्र की कमी युवाओं को हाशिए पर धकेल देती है, जिससे उनकी राजनीतिक रुचि घटती है।
सोशल मीडिया तक सीमित सक्रियता
आज के युवा राजनीतिक मुद्दों पर सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं, लेकिन यह सक्रियता अक्सर ऑनलाइन चर्चा तक ही सीमित रह जाती है। वास्तविक राजनीतिक भागीदारी, जैसे संगठनात्मक काम या चुनावी प्रक्रिया, इससे अलग रह जाती है।
विश्वास और प्रेरणा का अभाव
जब युवाओं को राजनीति में ईमानदार नेतृत्व और स्पष्ट बदलाव दिखाई नहीं देता, तो उनकी भागीदारी स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है। प्रेरणादायक नेताओं की कमी भी एक बड़ा कारण है।
आगे का रास्ता
युवाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों को उन्हें वास्तविक जिम्मेदारी देनी होगी। पारदर्शी राजनीति, रोज़गार से जुड़ी नीतियाँ और सकारात्मक राजनीतिक संवाद युवाओं को फिर से राजनीति से जोड़ सकते हैं।
निष्कर्ष
युवाओं की राजनीति में घटती भागीदारी लोकतंत्र के भविष्य के लिए चेतावनी है। यदि युवाओं को नीति-निर्माण और नेतृत्व में सार्थक भूमिका नहीं दी गई, तो लोकतंत्र अपनी ऊर्जा और नवाचार क्षमता खो सकता है। मजबूत लोकतंत्र के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
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