पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू हैं। भौगोलिक निकटता, सांस्कृतिक जुड़ाव, सुरक्षा और आर्थिक हितों के कारण पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध सीधे राष्ट्रीय हितों से जुड़े होते हैं।
भारत के पड़ोसी देश
भारत के प्रमुख पड़ोसी देशों में पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, अफगानिस्तान और मालदीव शामिल हैं। इन देशों के साथ भारत के संबंध इतिहास, राजनीति और रणनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग रहे हैं।
Neighbourhood First Policy
भारत की Neighbourhood First Policy का उद्देश्य पड़ोसी देशों के साथ सहयोग, विश्वास और पारस्परिक सम्मान को मजबूत करना है। इस नीति के तहत व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया गया है।
सकारात्मक संबंधों के उदाहरण
भारत के नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ संबंध सामान्यतः सहयोगात्मक रहे हैं। बांग्लादेश के साथ सीमा समझौता, व्यापार और कनेक्टिविटी में सुधार भारत की कूटनीतिक सफलता माने जाते हैं। भूटान के साथ भारत का संबंध रणनीतिक और विश्वासपूर्ण रहा है।
चुनौतियाँ और विवाद
पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंध सुरक्षा और सीमा विवादों के कारण जटिल बने हुए हैं। आतंकवाद, सीमा तनाव और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा इन संबंधों को प्रभावित करती रही है। इसके बावजूद, भारत संवाद और शांतिपूर्ण समाधान पर ज़ोर देता रहा है।
क्षेत्रीय सहयोग का महत्व
दक्षिण एशिया की स्थिरता और विकास के लिए क्षेत्रीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है। SAARC, BIMSTEC और अन्य बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से भारत आर्थिक विकास, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने का प्रयास करता है।
निष्कर्ष
पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध सहयोग और चुनौती — दोनों का मिश्रण हैं। संवाद, विश्वास और सहकारी कूटनीति के माध्यम से भारत अपने पड़ोस में शांति, स्थिरता और साझा विकास को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। मजबूत पड़ोसी संबंध भारत की वैश्विक भूमिका को और सशक्त बनाते हैं।
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