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न्यायपालिका में लोगों को न्याय मिलने में देरी क्यों? Delay in Justice in Indian Judiciary

न्यायपालिका में लोगों को न्याय मिलने में देरी भारत की न्याय व्यवस्था से जुड़ी सबसे बड़ी और गंभीर समस्याओं में से एक है। कई मामलों में न्याय पाने की प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि कहावत बन गई है — “Justice delayed is justice denied”। यह प्रश्न स्वाभाविक है कि आख़िर न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों होती है।


मामलों की अत्यधिक संख्या

भारतीय न्यायालयों में लाखों की संख्या में मामले लंबित हैं। हर साल नए मुकदमे दर्ज होते जाते हैं, लेकिन मामलों के निपटारे की गति उस अनुपात में नहीं बढ़ पाती। इस भारी बोझ के कारण न्याय प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाती है।


जजों की कमी

भारत में जनसंख्या के अनुपात में न्यायाधीशों की संख्या काफी कम है। कई अदालतों में पद लंबे समय तक खाली रहते हैं, जिससे मौजूदा जजों पर काम का दबाव बढ़ जाता है और फैसलों में देरी होती है।


जटिल कानूनी प्रक्रिया

न्यायिक प्रक्रिया काफी जटिल और तकनीकी होती है। बार-बार तारीखें पड़ना, गवाहों का अनुपस्थित रहना, दस्तावेज़ों की कमी और लंबी बहसें मुकदमों को और लंबा खींच देती हैं।


वकीलों की हड़ताल और टालमटोल

कई बार वकीलों की हड़ताल, जानबूझकर तारीख बढ़वाना या पक्षकारों की अनुपस्थिति न्याय प्रक्रिया को और धीमा कर देती है। इसका सीधा असर मुकदमों के निपटारे पर पड़ता है।


इन्फ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की कमी

कई अदालतों में पर्याप्त कोर्टरूम, स्टाफ और तकनीकी सुविधाओं का अभाव है। डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया तेज़ हुई है, लेकिन अभी भी ग्रामीण और निचली अदालतों में संसाधनों की कमी देरी का कारण बनती है।


न्याय में देरी का प्रभाव

न्याय में देरी गरीब और कमजोर वर्गों के लिए सबसे अधिक नुकसानदेह होती है। इससे न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमज़ोर होता है और कानून के शासन को नुकसान पहुँचता है।


समाधान और सुधार

न्याय में देरी कम करने के लिए जजों की संख्या बढ़ाना, फास्ट ट्रैक कोर्ट, डिजिटल कोर्ट सिस्टम, वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) जैसे मध्यस्थता और लोक अदालत को बढ़ावा देना जरूरी है। साथ ही, कानूनी प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाना अत्यंत आवश्यक है।


निष्कर्ष

न्यायपालिका में न्याय मिलने में देरी एक संरचनात्मक और प्रशासनिक समस्या है, जिसका समाधान व्यापक सुधारों से ही संभव है। तेज़, सुलभ और समयबद्ध न्याय व्यवस्था लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। यदि न्याय समय पर मिले, तो ही न्याय का वास्तविक अर्थ साकार हो सकता है।

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