January 2, 2026
नई दिल्ली: न्यायपालिका लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसका मुख्य कार्य कानून की व्याख्या करना, न्याय प्रदान करना और संविधान की रक्षा करना है। यह सुनिश्चित करती है कि देश में शासन कानून के अनुसार चले और किसी के साथ अन्याय न हो।
भारत में न्यायपालिका कार्यपालिका और विधायिका से स्वतंत्र होकर कार्य करती है, ताकि वह निष्पक्ष और निर्भीक होकर न्याय दे सके। इसी स्वतंत्रता के कारण न्यायपालिका को लोकतंत्र का प्रहरी भी कहा जाता है।
न्यायपालिका क्या है?
न्यायपालिका वह संवैधानिक संस्था है जो कानूनों का पालन सुनिश्चित करती है और विवादों का निपटारा करती है। यह नागरिकों, सरकार और विभिन्न संस्थाओं के बीच उत्पन्न विवादों में न्यायिक निर्णय देती है।
न्यायपालिका के प्रमुख कार्य
- नागरिकों को न्याय प्रदान करना
- कानूनों की व्याख्या करना
- मौलिक अधिकारों की रक्षा करना
- विवादों का निष्पक्ष निपटारा करना
- सरकार के कार्यों की संवैधानिक समीक्षा करना
Judicial Review के माध्यम से न्यायपालिका यह जाँच करती है कि सरकार द्वारा बनाए गए कानून संविधान के अनुरूप हैं या नहीं।
न्यायपालिका के उद्देश्य
- कानून का शासन (Rule of Law) स्थापित करना
- संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखना
- न्यायिक स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना
- सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना
- लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखना
लोकतंत्र में न्यायपालिका का महत्व
लोकतंत्र में न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की अंतिम संरक्षक होती है। यदि कार्यपालिका या विधायिका संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करती हैं, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करती है। इसी कारण एक मजबूत और स्वतंत्र न्यायपालिका किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
न्यायपालिका केवल न्याय देने वाली संस्था नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की संरक्षक भी है। निष्पक्ष, स्वतंत्र और सशक्त न्यायपालिका नागरिकों के विश्वास और लोकतांत्रिक स्थिरता की आधारशिला होती है।
No comments: