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भारतीय संविधान की सम्पूर्ण जानकारी

Indian Constitution

January 2, 2026

नई दिल्ली: संविधान किसी भी देश का सर्वोच्च कानून होता है, जो यह निर्धारित करता है कि देश का शासन कैसे चलेगा, सरकार के अधिकार और सीमाएँ क्या होंगी और नागरिकों के अधिकार व कर्तव्य क्या होंगे। भारतीय संविधान को देश के शासन की आत्मा माना जाता है।


भारत का संविधान

  • विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान
  • 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत
  • 26 जनवरी 1950 को लागू

26 जनवरी को भारत में गणतंत्र दिवस मनाया जाता है, जो संविधान के लागू होने का प्रतीक है।


संविधान निर्माता

  • संविधान सभा के अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • प्रारूप समिति के अध्यक्ष: डॉ. भीमराव अंबेडकर

इसी कारण डॉ. अंबेडकर को भारतीय संविधान का शिल्पकार कहा जाता है।


संविधान की प्रस्तावना (Preamble)

प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा जाता है। यह भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करती है।

प्रस्तावना नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की गारंटी देती है।


संविधान की संरचना

  • भाग (Parts): 25
  • अनुच्छेद (Articles): 448
  • अनुसूचियाँ (Schedules): 12
  • संशोधन: 105+

संविधान के प्रमुख भाग

मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12–35) नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, धार्मिक आज़ादी और संवैधानिक उपचार का अधिकार प्रदान करते हैं।

राज्य के नीति-निदेशक तत्व सरकार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत होते हैं, जो न्यायालय द्वारा लागू नहीं किए जा सकते, लेकिन नैतिक रूप से बाध्यकारी होते हैं।

मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A) नागरिकों को संविधान के सम्मान, राष्ट्रीय एकता और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी देते हैं।


शासन प्रणाली और संघीय ढांचा

भारत में संसदीय शासन प्रणाली है, जहाँ राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख और प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख होते हैं।

भारत में संघीय व्यवस्था है, लेकिन आपातकाल की स्थिति में केंद्र अधिक शक्तिशाली हो जाता है, इसी कारण भारत को अर्ध-संघीय राज्य भी कहा जाता है।


संविधान संशोधन और महत्व

संविधान में समय के साथ संशोधन की अनुमति है, लेकिन इसका मूल ढाँचा बदला नहीं जा सकता। यह लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता की रक्षा करता है।

PolitixHindi विश्लेषण:
भारतीय संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रता का आधार है। संविधान की समझ ही जागरूक नागरिकता की पहली शर्त है।
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