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Showing posts from December, 2025

नोएडा हिट एंड रन मामला: सेक्टर 39 में बाइक सवार की मौत और सड़क सुरक्षा पर सवाल

नोएडा: सेक्टर 39 थाना क्षेत्र में हुए एक हिट एंड रन हादसे ने एक बार फिर शहरी सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से एक बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आरोपी चालक घटना के बाद फरार हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार हादसा देर रात हुआ, जब सड़क पर ट्रैफिक अपेक्षाकृत कम था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। सीसीटीवी फुटेज के सहारे जांच पुलिस का कहना है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी वाहन और चालक की पहचान की जा सके। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि वाहन काफी तेज गति में था। "हादसे के बाद वाहन बिना रुके मौके से फरार हो गया, हम सभी संभावित सुरागों पर काम कर रहे हैं।" बार बार हो रहे सड़क हादसे नोएडा में हिट एंड रन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार, लापरवाही और नियमों की अनदेखी इन दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। रात के समय तेज रफ्तार से वाहन चलाना सीसीटीवी निगरानी के बावज...

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ: सीएम योगी का संदेश और अयोध्या का बदलता स्वरूप

अयोध्या: राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को लेकर अपनी सरकार के दृष्टिकोण और मंदिर आंदोलन के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आस्था का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या आज केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि विकास और विरासत के संतुलन का उदाहरण बन रही है। सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलें और शहर की ऐतिहासिक पहचान भी सुरक्षित रहे। "यह राष्ट्रीय गौरव का विषय है" योगी आदित्यनाथ के अनुसार, राम मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा लंबे संघर्ष और जन भावना का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह क्षण देश की आस्था और विश्वास को वैश्विक मंच पर स्थापित करता है। "राम मंदिर केवल एक संरचना नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और संस्कारों का प्रतीक है।" अयोध्या का विकास और भविष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में अयोध्या में बुनियादी ढांचे, सड़क, आवास और पर्यटन सुविधाओं का तेज...

'जन नायकन’ से ‘जन नेता’ तक: थलपति विजय की आख़िरी फिल्म और बदलती छवि

नई दिल्ली: साउथ सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। यह फिल्म न केवल विजय के करियर की आख़िरी फिल्म मानी जा रही है, बल्कि इसे उनकी बदलती राजनीतिक और सार्वजनिक छवि से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिल्म को पोंगल के मौके पर रिलीज़ किया जाएगा और हिंदी बेल्ट में इसे ‘जन नेता’ नाम से बड़े पैमाने पर रिलीज़ करने की तैयारी है। यह कदम विजय के पैन-इंडिया प्रभाव को और मज़बूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सिर्फ़ फिल्म नहीं, एक संदेश ‘जन नायकन’ को एक पारंपरिक मास एंटरटेनर से अलग माना जा रहा है। फिल्म की थीम और प्रचार-रणनीति यह संकेत देती है कि विजय अब पर्दे पर भी जनता से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखना चाहते हैं। “यह फिल्म केवल एक किरदार नहीं, बल्कि जनता से जुड़ी सोच को दर्शाती है।” हिंदी रिलीज़ और पैन-इंडिया रणनीति अब तक थलपति विजय की फिल्मों को हिंदी दर्शकों तक सीमित पहुंच मिलती रही है, लेकिन ‘जन नेता’ को इस ट्रेंड से अलग ले जाया जा रहा है। मेकर्स इसे बड़े स्तर पर हिंदी दर्शकों के सामने पेश कर...

नगर निकाय चुनाव या राजनीतिक कुर्सी दौड़? मतदाता क्यों हैं असमंजस में

पुणे: लंबे इंतज़ार के बाद नगर निकाय चुनावों की आहट ने राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ कर दी हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि मतदाता असमंजस में हैं। बार-बार बदलती राजनीतिक निष्ठाएं, गठबंधन टूटने-जुड़ने का खेल और अचानक हुए दल-बदल ने स्थानीय चुनावों को एक राजनीतिक “म्यूज़िकल चेयर” में बदल दिया है। शहर के कई इलाकों में मतदाताओं का कहना है कि उन्हें यह तक स्पष्ट नहीं है कि कौन सा नेता किस पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहा है। स्थानीय मुद्दों — जैसे सड़कें, पानी, कचरा प्रबंधन और ट्रैफिक — पर चर्चा पीछे छूटती नज़र आ रही है। दल बदल, गठबंधन और भ्रम नगर निकाय चुनाव आमतौर पर स्थानीय नेतृत्व को परखने का अवसर होते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। राज्य स्तर की राजनीति का असर इतना गहरा है कि स्थानीय उम्मीदवारों की पहचान पार्टी के झंडे से ज़्यादा उनके हालिया राजनीतिक फैसलों से हो रही है। “कल तक जो नेता विरोधी थे, आज एक ही मंच पर हैं। ऐसे में भरोसा किस पर करें?” — एक स्थानीय मतदाता स्थानीय मुद्दे हाशिये पर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि राजनीतिक उठा-पटक का सबसे बड़ा नुकसान स्...

अरावली विवाद पर अशोक गहलोत: “यह राजनीति नहीं, आने वाली पीढ़ियों का सवाल है”

नई दिल्ली: अरावली पर्वतमाला को लेकर चल रहे विवाद के बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गहलोत का कहना है कि यह मामला किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली से जुड़े आदेश पर लगाई गई रोक का स्वागत करते हुए कहा कि जनता की आवाज़ और जन आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में जनभागीदारी की शक्ति कितनी महत्वपूर्ण है। “यह जन आंदोलन था, राजनीति नहीं” अशोक गहलोत के अनुसार, अरावली को बचाने के लिए शुरू हुआ अभियान किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा संचालित नहीं था। उन्होंने कहा कि छात्रों, युवाओं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने मिलकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस बना दिया। “हमने केवल लोगों से अपनी डीपी बदलने की अपील की थी, लेकिन यह एक जन आंदोलन में बदल गया।” — अशोक गहलोत खनन और पर्यावरण को लेकर चिंता गहलोत ने कहा कि भले ही सरकार यह दावा कर रही हो कि सीमित क्षेत्र में ही खनन की अनुमति ...