January 2, 2026
नई दिल्ली: भारतीय संसद देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण संस्थान है, जहाँ कानून बनाए जाते हैं, नीतियों पर बहस होती है और सरकार की जवाबदेही तय की जाती है। संसद जनता की आकांक्षाओं को राष्ट्रीय मंच पर रखने का मुख्य माध्यम मानी जाती है।
भारतीय संसद संविधान द्वारा स्थापित संस्था है, जो शासन के तीनों अंगों में विधायिका की भूमिका निभाती है। यह न केवल कानून निर्माण का केंद्र है, बल्कि लोकतंत्र की जीवंतता का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब भी है।
भारतीय संसद की संरचना
भारतीय संसद तीन अंगों से मिलकर बनी है — राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा। लोकसभा जनता द्वारा चुनी जाती है, जबकि राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है। राष्ट्रपति संसद का अभिन्न हिस्सा होते हैं, जिनकी स्वीकृति से कानून प्रभावी होते हैं।
- लोकसभा — जनता का सदन
- राज्यसभा — राज्यों का प्रतिनिधित्व
- राष्ट्रपति — संवैधानिक प्रमुख
संसद के प्रमुख कार्य
संसद का मुख्य कार्य कानून बनाना है, लेकिन इसके साथ-साथ सरकार की नीतियों की समीक्षा, वित्तीय नियंत्रण और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा भी इसके अहम दायित्व हैं। प्रश्नकाल और बहसों के माध्यम से कार्यपालिका को जवाबदेह बनाया जाता है।
- कानून निर्माण
- कार्यपालिका पर नियंत्रण
- बजट और वित्तीय स्वीकृति
- राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस
लोकतंत्र में संसद का महत्व
लोकतंत्र में संसद जनता की आवाज़ होती है। यह वह मंच है जहाँ विभिन्न विचारधाराएँ, क्षेत्रीय मुद्दे और सामाजिक सरोकार खुलकर सामने आते हैं। एक सशक्त संसद लोकतंत्र की मजबूती का सबसे बड़ा संकेत मानी जाती है।
वर्तमान समय में चुनौतियाँ
आज के समय में संसद के सामने कार्यवाही में व्यवधान, राजनीतिक टकराव और गंभीर चर्चा की कमी जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। इसके बावजूद, संसद का सक्रिय और जिम्मेदार होना लोकतांत्रिक संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भारतीय संसद केवल कानून बनाने की संस्था नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है। संवाद, बहस और सहमति की संस्कृति संसद को मजबूत बनाती है और यही लोकतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी ताकत है।
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