Indian Foreign Policy क्या है: भारत की विदेश नीति के सिद्धांत और वर्तमान दृष्टिकोण



January 4, 2026

Indian Foreign Policy (भारत की विदेश नीति) देश के राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाती है। भारत की विदेश नीति समय के साथ बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार विकसित होती रही है।


भारतीय विदेश नीति का अर्थ

विदेश नीति वह रणनीति है जिसके माध्यम से भारत अन्य देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक संबंध स्थापित और संचालित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करना होता है।


Indian Foreign Policy के प्रमुख सिद्धांत

1. गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment):
शीत युद्ध के दौर में भारत ने किसी भी महाशक्ति गुट में शामिल न होकर स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई।

2. रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy):
भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार स्वतंत्र निर्णय लेने में विश्वास करता है, चाहे वैश्विक दबाव कुछ भी हो।

3. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व:
पंचशील सिद्धांतों के तहत भारत संप्रभुता के सम्मान, अहिंसा और शांति पर ज़ोर देता है।


वर्तमान समय में भारतीय विदेश नीति

आज की Indian Foreign Policy multi-alignment पर आधारित है। भारत USA, Russia, Europe, Middle East और Asia-Pacific देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है। Neighbourhood First, Act East और Global South leadership इस नीति के प्रमुख स्तंभ हैं।


आर्थिक और सामरिक आयाम

विदेश नीति का आर्थिक पहलू Trade, Investment और Technology cooperation से जुड़ा है। वहीं, सामरिक दृष्टि से भारत रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर ज़ोर देता है।


चुनौतियाँ और अवसर

भू-राजनीतिक तनाव, सीमा विवाद, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन भारतीय विदेश नीति के लिए बड़ी चुनौतियाँ हैं। इसके बावजूद भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, डायस्पोरा और डिप्लोमैटिक क्षमता नए अवसर भी पैदा कर रही है।


निष्कर्ष

Indian Foreign Policy भारत की वैश्विक पहचान और राष्ट्रीय हितों की रक्षा का मुख्य साधन है। संतुलन, संवाद और रणनीतिक सोच के साथ भारत 21वीं सदी में एक जिम्मेदार और प्रभावशाली वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है।

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