January 4, 2026
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (District Magistrate – DM) जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है। इसे आमतौर पर जिलाधिकारी भी कहा जाता है। DM जिले में प्रशासन, कानून-व्यवस्था और सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन का मुख्य जिम्मेदार होता है।
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट कौन होता है?
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आमतौर पर IAS (Indian Administrative Service) का अधिकारी होता है। इसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। DM जिले में राज्य सरकार और केंद्र सरकार — दोनों का प्रतिनिधि माना जाता है।
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के प्रमुख अधिकार
1. कानून-व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार:
DM के पास
धारा 144 लागू करने,
कर्फ्यू लगाने और
भीड़ पर नियंत्रण के अधिकार होते हैं।
2. कार्यपालिक दंडाधिकारी के अधिकार:
DM जिले का
Chief Executive Magistrate होता है
और दंड प्रक्रिया संहिता के तहत
कई न्यायिक शक्तियाँ रखता है।
3. आपदा प्रबंधन का अधिकार:
प्राकृतिक आपदा,
महामारी या
आपात स्थिति में
DM राहत और बचाव कार्यों का
नेतृत्व करता है।
4. भूमि और राजस्व से जुड़े अधिकार:
जिले में
भूमि रिकॉर्ड,
राजस्व वसूली और
सरकारी जमीन की देखरेख
DM की जिम्मेदारी होती है।
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के प्रमुख कार्य
- जिले में सरकारी योजनाओं को लागू करना
- कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखना
- पुलिस और अन्य विभागों के बीच समन्वय
- चुनाव प्रक्रिया का संचालन
- जनता की शिकायतों का निवारण
- विकास कार्यों की निगरानी
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का महत्व
DM जिले का Administrative Backbone माना जाता है। सरकार की नीतियाँ जमीन पर कितनी प्रभावी होंगी, यह काफी हद तक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की कार्यकुशलता पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जिले के प्रशासन, कानून-व्यवस्था और विकास का मुख्य स्तंभ होता है। उसके अधिकार और कार्य जिले में सुशासन, शांति और जनकल्याण सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
Comments
Post a Comment