पार्लियामेंट में कानून बनने की प्रक्रिया क्या है: विधेयक से कानून तक का सफर



January 4, 2026

संसद में कानून बनने की प्रक्रिया भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक मूल आधार है। किसी भी कानून को लागू करने से पहले उसे संसद के दोनों सदनों से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पारित होना अनिवार्य होता है।


कानून का प्रारूप: विधेयक (Bill)

किसी भी नए कानून की शुरुआत विधेयक (Bill) से होती है। विधेयक सरकार या किसी सांसद द्वारा लोकसभा या राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाता है। वित्त विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।


पहला वाचन (First Reading)

इस चरण में विधेयक को सदन में औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया जाता है। इस पर विस्तृत चर्चा नहीं होती, बल्कि विधेयक का शीर्षक और उद्देश्य सदन के सामने रखा जाता है।


दूसरा वाचन (Second Reading)

दूसरा वाचन सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें विधेयक के प्रत्येक प्रावधान पर विस्तृत चर्चा होती है। आवश्यकता पड़ने पर विधेयक को संसदीय समिति के पास जाँच के लिए भेजा जाता है।


तीसरा वाचन (Third Reading)

तीसरे वाचन में विधेयक पर अंतिम चर्चा होती है। इस चरण में केवल विधेयक को स्वीकार या अस्वीकार करने पर मतदान होता है। यदि विधेयक बहुमत से पारित हो जाता है, तो यह दूसरे सदन में भेजा जाता है।


दूसरे सदन की स्वीकृति

विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा — दोनों से पारित होना आवश्यक है। यदि दूसरा सदन संशोधन करता है, तो दोनों सदनों की सहमति जरूरी होती है। असहमति की स्थिति में संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है।


राष्ट्रपति की स्वीकृति

दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद विधेयक कानून (Act) बन जाता है।


निष्कर्ष

संसद में कानून बनने की प्रक्रिया बहस, समीक्षा और लोकतांत्रिक सहमति पर आधारित होती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि कोई भी कानून जनहित, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप बनाया जाए।

Comments